द लास्ट सेल्फी – डिजिटल कर्ज़ और परिवारों का विनाश

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May 11, 2026 - 15:26
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11 May 2026
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द लास्ट सेल्फी – डिजिटल कर्ज़ और परिवारों का विनाश

डिजिटल कर्ज़

भोपाल (मध्य प्रदेश), फरवरी 16: Orchestro.AI, के संस्थापक और CEO शेखर नटराजन इस लेख में डिजिटल कर्ज़ और सूदखोरों के प्रभाव को समझाते हैं।

12 जुलाई 2023 को भूपेंद्र विश्वकर्मा ने अपने परिवार को एक तस्वीर के लिए एकत्र किया।

उस तस्वीर में, जो बाद में पूरे भारत में वायरल हो गई, 38 वर्षीय बीमा एजेंट अपनी 35 वर्षीय पत्नी ऋतु और अपने दो बेटों — 9 वर्षीय ऋषिराज और 3 वर्षीय रितुराज — के साथ खड़े हैं। वे किसी भी मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार की तरह दिखते हैं — साधारण, सामान्य, पूर्ण।

भूपेंद्र ने तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा:
“हमारी आखिरी पारिवारिक तस्वीर।”

तस्वीर लेने के बाद उन्होंने अपने बेटों को ज़हर मिला पेय पिला दिया। फिर उन्होंने और ऋतु ने रतिबड़ की शिव विहार कॉलोनी स्थित अपने घर में फांसी लगा ली।

अपने चार पन्नों के सुसाइड नोट में भूपेंद्र ने बताया कि Tata AIG में स्थायी नौकरी और एक स्नेही परिवार होने के बावजूद आखिर उन्हें ऐसा कदम उठाने पर क्या मजबूर कर गया:

“उसे कह दो कि कर्ज़ चुका दे, नहीं तो आज उसे नंगा करके सोशल मीडिया पर डाल दूंगा।”

यह अंतिम संदेश था जो उन्हें एक डिजिटल लोन ऐप के रिकवरी एजेंट से मिला था — उन सैकड़ों संदेशों में से एक, जिन्होंने महीनों तक उन्हें प्रताड़ित किया। एजेंटों ने उनका फोन हैक कर लिया, उनके संपर्कों और फोटो गैलरी तक पहुंच बनाई, उनकी तस्वीरों को अश्लील सामग्री में मॉर्फ कर दिया और उन्हें उनके परिवार, मित्रों और सहकर्मियों को भेज दिया। उन्होंने उनके बुजुर्ग माता-पिता को फोन किया। उनकी पत्नी को धमकियां दीं।

यह सब इसलिए किया गया क्योंकि वे कर्ज़ की एक किस्त समय पर नहीं चुका पाए थे।

जाल

भूपेंद्र विश्वकर्मा हमेशा से हताश नहीं थे। वे एक बीमा एजेंट के रूप में काम करते थे और ऑनलाइन काम से अतिरिक्त आय अर्जित करते थे। अप्रैल 2023 में उन्हें व्हाट्सऐप पर एक पार्ट-टाइम नौकरी का संदेश मिला — एक ई-कॉमर्स कंपनी, जो कथित रूप से कोलंबिया में COVID के बाद स्थापित हुई थी।

“अतिरिक्त पैसा कमाने की सोचकर मैंने घर से काम करने के लिए हामी भर दी,” उन्होंने अपने सुसाइड नोट में लिखा। कंपनी की वेबसाइट विश्वसनीय लग रही थी।

इसके बाद एक सुनियोजित धोखाधड़ी शुरू हुई। “नौकरी” के तहत उन्हें विभिन्न ऐप्स से लोन लेने के लिए कहा गया, जो कथित रूप से काम का हिस्सा था। इन लोन की राशि उन खातों में ट्रांसफर की गई जिन पर उनका नियंत्रण नहीं था। जब तक उन्हें सच्चाई का एहसास हुआ, वे 17 लाख रुपये के कर्ज़ में डूब चुके थे।

“मैं इस पैसे का उपयोग घर में भी नहीं कर पाया,” उन्होंने लिखा। “मुझे पता भी नहीं चला और काम का दबाव बढ़ता गया। जब मेरे पास पैसे खत्म हो गए, तो कंपनी ने लोन और एग्रीमेंट की मांग शुरू कर दी।”

जब उन्होंने रुकने की कोशिश की, तो उत्पीड़न शुरू हो गया।

एल्गोरिदमिक आतंक

भूपेंद्र को जाल में फंसाने वाले लोन ऐप्स अब एक महामारी का रूप ले चुके हैं। सेवदेहम इंडिया फाउंडेशन के निदेशक प्रवीण कलाईसेलवन के अनुसार, लोन ऐप उत्पीड़न की शिकायतें 2020 में 29,000 से बढ़कर 2021 में 76,000 हो गईं, और 2022 के पहले नौ महीनों में ही 46,000 से अधिक दर्ज हुईं।

सिर्फ एक वर्ष में कम से कम 64 लोगों ने लोन ऐप उत्पीड़न के कारण आत्महत्या की। वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है — कई मामलों को व्यक्तिगत समस्या मानकर दर्ज ही नहीं किया जाता।

इन ऐप्स की कार्यप्रणाली अब “एल्गोरिदमिक आतंक” में बदल चुकी है:

  • 2020: खुलासा करने की धमकी, लेकिन संपर्कों को कॉल नहीं।

  • 2021: रिकवरी एजेंटों ने सीधे पीड़ितों के संपर्कों को कॉल करना शुरू किया।

  • 2022: आधार और पैन कार्ड की जानकारी संपर्कों को भेजकर पीड़ितों को चोर बताया गया।

  • 2023: मॉर्फ की गई नग्न तस्वीरें बनाकर संपर्कों में प्रसारित की गईं, एडल्ट वेबसाइट्स पर पोस्ट की गईं।

जब कोई उधारकर्ता ऐप को संपर्क और फोटो तक पहुंच की अनुमति देता है — जो लोन पाने की शर्त होती है — तो वह अपने विनाश के उपकरण खुद सौंप देता है। ऐप्स फोन नंबर, तस्वीरें, लोकेशन डेटा सब कॉपी कर लेते हैं। वे चेहरे की पहचान तकनीक और एआई का उपयोग करके मॉर्फ तस्वीरें बनाते हैं।

दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम से संचालित कॉल सेंटर — जिनमें कई मामलों में चीनी निवेशकों की भूमिका पाई गई — इस उत्पीड़न को अंजाम देते हैं।

संकट के चेहरे

भूमि सिन्हा, मुंबई: वेतन में देरी के कारण छोटा लोन लिया। सात दिन में चुकाने की उम्मीद थी। देरी होते ही उत्पीड़न शुरू हो गया।
“मैं सुन्न हो गई थी… मेरी मॉर्फ की गई नग्न तस्वीरें मेरी बेटी और परिवार के परिचितों को भेज दी गईं।”

किरनी मौनिका, 24, तेलंगाना: कई ऐप्स से लोन लिया। लगातार उत्पीड़न के बाद आत्महत्या कर ली।

22 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र, बेंगलुरु: सुसाइड नोट में लिखा — “सॉरी, मां-पापा…”

कोच्चि का एक परिवार: 12 सितंबर 2023 को एक ही परिवार के चार सदस्यों ने आत्महत्या कर ली।

29 वर्षीय टेक कर्मचारी, हैदराबाद: 30 से अधिक ऐप्स से लोन लिया। 400 से अधिक कॉल, 10 व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर सार्वजनिक अपमान।

अंडरकवर जांच

BBC की एक डॉक्यूमेंट्री जांच में दिल्ली और नोएडा के दो कॉल सेंटरों में अंडरकवर ऑपरेशन किया गया। वहां पाया गया कि यह व्यक्तिगत क्रूरता नहीं, बल्कि व्यवस्थित उत्पीड़न था।

एक मैनेजर, विशाल चौरसिया, ने कहा कि वह वसूली के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। एक अन्य एजेंट ने सुझाव दिया कि पीड़ित “अपनी बहन, घर या जमीन बेच दें।”

जांच में परशुराम तकवे का नाम सामने आया, जो कई कॉल सेंटर संचालित करता था। आत्महत्या के मामलों के बढ़ने के बाद वह और उसकी चीनी पत्नी फरार हो गए।

प्रतिक्रिया की विफलता

भूपेंद्र ने मदद मांगने की कोशिश की। उन्होंने भोपाल के साइबर क्राइम कार्यालय का दौरा किया, लेकिन कोई सहायता नहीं मिली।

भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर Shaktikanta Das ने स्वीकार किया कि कई डिजिटल लेंडिंग ऐप्स केंद्रीय बैंक के नियामक दायरे में नहीं हैं। आरबीआई ने 600 से अधिक अवैध लोन ऐप्स की पहचान की है। Google ने अपने प्ले स्टोर से 2,200 से अधिक ऐप्स हटा दिए हैं। लेकिन ये ऐप्स नए नामों से फिर सक्रिय हो जाते हैं।

भूपेंद्र के मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई और 200 से अधिक बैंक खातों का पता चला। लेकिन मुख्य संचालक अब भी फरार हैं।

क्रूरता की संरचना

शेखर नटराजन इसे “मूल्यों के बिना अनुकूलन” कहते हैं।

“ये सिस्टम सिर्फ एक चीज़ के लिए ऑप्टिमाइज़ हैं — वसूली। हर फीचर उसी उद्देश्य की पूर्ति करता है। कोई संतुलन नहीं, कोई नैतिक रोक नहीं।”

यदि सिस्टम में करुणा (मैत्री), धैर्य (सहन), अहिंसा और विवेक जैसे मूल्य होते, तो शायद परिणाम अलग होता।

“भूपेंद्र विश्वकर्मा इसलिए नहीं मरे क्योंकि किसी ने उन्हें नष्ट करने का फैसला किया,” नटराजन कहते हैं। “वे इसलिए मरे क्योंकि किसी ने उन्हें बचाने का निर्णय नहीं लिया। सिस्टम दया के लिए बना ही नहीं था।”

शिव विहार कॉलोनी में आज एक पारिवारिक तस्वीर खाली घर की दीवार पर टंगी है — चार मुस्कुराते चेहरे, जिन्हें एल्गोरिदम ने मिटा दिया।

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